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Swayam Ka Ghuspaithiya

Dr. Pariksith Singh

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परीक्षित सिंह, सर्व प्रथम, एक कवि और दार्षनिक है, हालांकि किसी षैक्षिक या बांधे हुए ढांचे के नहीं। जीवन षास्त्र और कार्य षास्त्र में जो उनका विकास हुआ था और हो रहा है, वह उनके जीवन का अनूठा दर्षन है जिसे उन्होंने अत्यंत विषिश्ट रूप से अपने काव्य में व्यक्त किया है। चाहे वो किसी मरीज को उपचार कर रहे हों, व्यवसाय चला रहे हों या हाइकू लिख रहे हों, परीक्षित सिंह हमेषा आत्मिक का भौतिक में पूर्ण अभिव्यक्ति का अन्वेशण करते हैं - और यही परीक्षित का उनके सभी कार्यों में अनोखा और अविचल हस्ताक्षर है। परीक्षित की साहित्य रचना में यह “आंतरिक अन्वेशण” ही उनकी अभिव्यक्ति है, और इसी लिए रूप का भाव से नित संघर्श उनके षब्द प्रवाह में स्पश्ट है। इस प्रकार, आप परीक्षित के लेखन - उनकी कविताएँ, कहानियाँ, साहित्यिक आलोचनाएँ, और उनके प्रचलित अनुवाद में (हिंदी, संस्कृत, उर्दू से) रूप और भाव की, तकनीक और कथा, षैली और सार की, आष्चर्यजनक रचनामकता पाएँगे और इसी तरह से, सरासर विरोधाभासी, जटिल और कभी-कभी हास्य और गांभीर्य की एकरंगता पाएंगे। लेकिन फिर, यह आपके लिए परीक्षित सिंह और उनकी षैली की अभिव्यंजना है! विशय वस्तु के संदर्भ में, परीक्षित की पहुँच आष्चर्यजनक है - गूढ़ प्राचीन भारतीय योग और चीनी ताओ से समकालीन ज़ेन, क्वांटम भौतिकी से चिकित्सा विज्ञान तक, वह आसानी से अर्थों और गैर-अर्थों का चित्रण करते हैं। परीक्षित के रूप उनके विसरित प्रयोगों में पारंपरिक संरचनाओं से मुक्त कविता तक, रचनात्मक हाइकू से कोआन की तरह दो पंक्तियों में, संरचित लघुकथा से लेकर नव-आधुनिक अर्ध-काव्य गद्य तक सहर्श प्रभावित करते हैं। परीक्षित भविश्य के कवि है। उनका समय भी निकट भविश्य में आने वाला ही है।

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Dr. Pariksith Singh

Pariksith Singh is, first of all, a poet and a philosopher, though not of any academic mould. He has evolved and is still evolving, his own philosophy of life and work which he has been articulating in terms of his very personalized poetry and equally personalized medical practice. Whether healing a patient, running a business or writi...

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