जब भी कभी तेरा नाम लिखा

Ravinder Kandari

Poetry

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Ravinder Kandari

Ravinder Kandari is Delhi based professional engineer. He uses words to convey feelings and emotions that are unsaid through his voice.

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Nightbreak

Taseer Gujral

Its been a week
of falling apart
though the night makes me believe
we are fine
so i pull over the curb
click the key into the lock
step into the shower
meanwhile
bullets keep flying over
a war ravaged world
gulping a draft of water
i hold my breath lying next to you
all is fine, we believe as we make love
In the foreground of a 70s number
meanwhile
bullets keep flying over
a war ravaged world
In the cusp of a rising fall
we forget that we are not meant
for each other
even if for a brief while
night is the light that stops us
from falling apart
like frayed, dead leaves.

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शरद: कुछ काव्य-चित्र

Kailash Manhar

(एक)
कास के रेशमी फूलों को सहला रहा है
किशोर वय का सुकोमल हाथ
गूलर के पके हुये फलों को देख रही हैं
उफनते यौवन की रतनारी आँखें
(दो)
झील की सतह पर खिली है शुभ्र ज्योत्सना
तल में से झांक रहा है पूर्ण चन्द्र
तुम भी होते यदि साथ
यह रात हमारे लिये अविस्मरणीय होती प्रेम!
(तीन)
पीपल की डाल पर प्रेम मग्न पक्षी-युगल
हवायें सिहरा रहीं हैं तन-बदन
मन में कोई हूक-सी उठती है
बांध कर रख लूँ तुम्हें चाँदनी की डोर से
(चार)
केसर में नहाई है देह
कैर के फूलों का रंग लेपा है अधरों पर
कांटों में उलझा है आँचल
छुड़वा कर ले चलो साथ कहीं दूर मुझे
भोर का उजास होने के पहले ही
(पाँच)
शरद की चाँदनी में सीझ रही है
अँगीठी की धीमी आँच पर
गाय के दूध की सुमधुर खीर
बल बुध्दि वीर्य वर्धक
तुलसी-दल डाल दो तुम अपने हाथों से
(छह)
मोगरा महकता है सांसों में
हवायें बह रही हैं मलय-गंधी
स्वप्न-स्वप्न झरती है उत्कंठा
शरद में होना था दोनों को साथ-साथ
(सात)
कार्तिक-स्नान से लौट रही हैं स्त्रियाँ
मंदिर में गूंजने लगे आरती के स्वर
शरद के रंग में रंगा है ईश्वर भी
हरि यश में गाती है मिलन-गीत विरहिनी

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रुके न तू

Harivansh Rai Bachchan

धरा हिला, गगन गुँजा
नदी बहा, पवन चला
विजय तेरी, विजय तेरीे
ज्योति सी जल, जला
भुजा–भुजा, फड़क–फड़क
रक्त में धड़क–धड़क
धनुष उठा, प्रहार कर
तू सबसे पहला वार कर
अग्नि सी धधक–धधक
हिरन सी सजग सजग
सिंह सी दहाड़ कर
शंख सी पुकार कर
रुके न तू, थके न तू
झुके न तू, थमे न तू
सदा चले, थके न तू
रुके न तू, झुके न तू

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