Ikram Rajasthani

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Ikram Rajasthani


‘लोकमान’ उपाधि से सम्मानित इकराम राजस्थानी को ‘राष्ट्रीय एकता पुरस्कार’, ‘महाकवि बिहारी पुरस्कार’, ‘राष्ट्र रत्न’, ‘वाणी रत्न’, ‘तुलसी रत्न’ और ‘समाज रत्न’ के साथ-साथ अनेक प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए हैं।

वरिष्ठ गीतकार और अन्य अनेक उपाधियों से अलंकृत इकराम राजस्थानी ने ‘मरुधरा सूं निपज्या गीत’ और ‘क़लम ज़िन्दा रहे’ के अतिरिक्त ‘तारां छाई रात’, ‘पल्लो लटके’, ‘गीतां री रमझोल’, ‘शबदां री सीख’, ‘खुले पंख’ और ‘पैगम्बरों की कथाएँ’ इत्यादि पुस्तकों की रचना की है। उन्होंने हज़रत शेख सादी के ‘गुलिस्तां’ का राजस्थानी भाषा में प्रथम काव्यानुवाद और रवीन्द्रनाथ टैगोर की विश्वप्रसिद्ध कृति ‘गीतांजलि’ का राजस्थानी भाषा में काव्यानुवाद 'अंजली गीतां री' किया है। वह विश्व के प्रथम कवि हैं, जिन्होंने ‘कुरान शरीफ़’ का राजस्थानी और हिन्दी भाषा में भावानुवाद किया है।